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Diese Seite befast sich mit der
Röhrenherstellung.
Der Quetschfuß Beginnen will ich mit den Quetschfuß. Auf den Bild könnt Ihr den Aufbau erkennen. In der Folge werde ich in einer eine Tabelle darstellen, die Anordnung der Drähte im Quetschfuß. |
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| Die Betrachtung erfolgt von der Getterpillenhalter abgekehrten Seite oder, falls keiner vorhanden, von der Seite des Quetschfußes auf der Pumpenstutzen mündet. | ![]() |
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| Röhre | links | rechts | Röhre | links | rechts |
| AB 1 | 3=d1,2=F, 1=f | 1=K | AB 2 | 3=d2, 2=K,1=f | 1=F,2=d1 |
| ABC 1 | 3=A,2=d1, 3=f | 1=f,2=d2,3=K | ABL 1 | 3=d1,2=K,1=f | 1=f,2=d2,3=g2,4=A |
| AC 2 | 2=A,1=f | 1=f,2=k | ACH1 | 3=g2+4,2=AT,1=f | 1=f,2=k |
| AD 1 | 2=g,1=f | 1=f,2=A | AF 7 (Te) | 3=g3,2=g2,1=f | 1=f,2=k,3=A |
| AK 2 | 4=A,3=K,2=g2,1=f | 1=f,2=g1,3=g3+5 | AL 1 | 2=A,1=f | 1=f,2=g1,3=g2 |
| AL 4 (Te) | 3=A,2=g2,1=f | 1=f 2=g1 3=K | AL 5 | 3=K,2=g1,1=f | !=f,2=g2,3=A |
| AL 4(Va) | 3=K, 2=g1,1=f | 1=f,2=g2,3=A | AM 2 | 4=L,3=g12=K1=f | 1=f,2=gl,3=A |
| CBC 1 | 3=A,2=D1,1=f | 1=f,2=d2,3=K | CF 3 (Te) | 3=A,2=g2,1=f | 1=f,2=K,3=g3 |
| CF 3 (Loe) | 3=g3,2=k,1=f | 1=f,2=g2,3=A | CF 7 (Te) | 3=A,2=g2,1=f | 1=f,2=K,3=g3 |
| CF 7 (Loe) | 3=g3,2=k,1=f | 1=f,2=g2,3=A | CK 1 | 3=K,2=g2,1=f | 1=f,2=g1,3=3+5,4=A |
| CL 1 | 2=K,1=f | 1=f,2=g2,3=A | CL 2 | 3=A,2=g2,1=f | 1=f,2=K |
| CL 4 | 3=A,2=g2,1=f | 1=f 2=K | EFM 11 | 3=A,2=g1,1=K | 1=f,2=f,3=g2,4=L |
| EL 11 | 3=K,2=g1,1=f | 1=f,2=g2,3=A | EL 12 | 3=a,2=g2,1=f | 1=f,2=g1,3=k |
| EM 11 | 3=A2,2=A1,1=f | 1=f,2=K,3=g,4=L | KC 1 | 2=A,1=f | 1=f,2=g |
| KC 3 | 2=g,1=f | 1=f,2=A | KF 3 | 3=g3,2=g2,1=f | 1=f,2=A |
| KF 4 | 3=g3,2=g2,1=f | 1=f,2=A | KL 1 | 2=A,1=f | 1=f,2=g1,3=g2 |
| KL 2 | 2=g2,1=f | 1=f,2=g1,3=A | KL 4 | 2=f,1=g1 | 1=f,2=g2,3=A |
| VC 1 | 2=A, 1=f | 1=f,2=K | VCL 11 | 4=Aq,3=f,2=f,1=K | 1=g1q,2=g2q,3=AT,4=gT |
| VF 7 | 3=g3,2=g2,1=f | 1=f,2=K,3=A | VL1 | 2=K,1=f | 1=f,2=g2,3=A |
| VL 4 | 3=A,2=g2,1=f | 1=f,2=K | CY 1 | 2=K,1=f | 1=f,2=A |
| VY1 | 2=k,1=f | 1=f,2=A | VY 2 | 2=K,1=f | 1=f,2=A |
| UY 11 | 2=K,1=f | 1=f,2=A | CY1 (Va) | 2=K,1=f | 1=f,2=A |
| CY 2 (Te) | 3=A1,2=f,1=K2 | 1=K1,2=f,3=A" | CY 2 (Sa) | 3=A1,2=K2,1=f | 1=f,2=K1f,3=A |
| RE034 | 2=A,1=f | 1=f,2=g | RE 074 | 2=A,1=f | 1=f,2=g |
| RE 084 | 2=g,1=f | 1=A,2=f | RE134(Te) | 2=A,1=f | 1=f,2=g |
| RE134(Va) | 2=g,1=f | 1=f,2=A | REN904(Te) | 3=A,2=f,1=f, | 1=g1,2=K |
| REN904(Tu) | 2=K,1=f, | 1=g1,2=g,3=A | REN904(Va) | 2=K,1=g | 1=f,2=f,3=A |
| REN1004(Te) | 2=A,1=g | 1=f,2=f,3=K | RENS1224 | 4=A,3=g4,2=K,1=f | 1=f,2=g2,3=g3 |
| RENS1374d(Te) | 3=g1,2=f,1=K | 1=f,2=g2,3=A | RENS1873d(Te) | 3=g1,2=f,1=A | 1=f,2=g2,3=k |
| Abkürzungen: Va= Valvo, Sa =Sator, Te=Telefunken, Loe= Loewe // A= Anode, K = Katode, g = Gitter, f = Heizung, L = Leuchtschirm // für die Richtigkeit der Angaben wird keine Gewähr gegeben! // Quelle: Gebrauchsverlängerung von Röhren Funkschau Verlag München 1944 Verfasser: Herr Jacobs und Köppen // Achtung verschiedene Hersteller haben verschiedene Reihenfolgen im Quetschfuß angewendet, deshalb auch die Anmerkung hinter den Röhrenbezeichnungen! | |||||
| Schiebedetektor | Funkengenerator |